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ऐसे में एक महत्वपूर्ण प्रश्न स्वाभाविक रूप से सामने आता है—क्या रेलवे कर्मचारी सोशल मीडिया पर अपनी इच्छा अनुसार कुछ भी लिख या प्रकाशित कर सकता है?
इसका उत्तर है—नहीं।
रेलवे कर्मचारी एक सामान्य नागरिक होने के साथ-साथ भारत सरकार का लोक सेवक (Public Servant) भी है। इसलिए उसका सार्वजनिक आचरण Railway Services (Conduct) Rules, 1966 से नियंत्रित होता है। ये नियम केवल कार्यालय के भीतर के व्यवहार तक सीमित नहीं हैं, बल्कि अनेक परिस्थितियों में कर्मचारी के सार्वजनिक वक्तव्य, लेख, भाषण, वीडियो तथा सोशल मीडिया पर किए गए आचरण पर भी लागू हो सकते हैं।
यहाँ एक बात स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है कि Railway Services (Conduct) Rules, 1966 उस समय बनाए गए थे जब Facebook, YouTube, Instagram, Telegram या WhatsApp जैसे प्लेटफ़ॉर्म अस्तित्व में नहीं थे। इसलिए इनका नाम नियमों में नहीं मिलेगा। परन्तु समय-समय पर हुए संशोधनों, विशेषकर Electronic Media से संबंधित प्रावधानों तथा रेलवे बोर्ड एवं भारत सरकार द्वारा जारी स्पष्टीकरणों के आधार पर इन नियमों की व्याख्या आज के डिजिटल परिवेश में भी की जाती है।
इसका अर्थ यह नहीं है कि रेलवे कर्मचारियों को सोशल मीडिया का उपयोग करने से रोका गया है। वास्तव में रेलवे कर्मचारी भी अन्य नागरिकों की तरह सोशल मीडिया का उपयोग कर सकते हैं। लेकिन उन्हें यह ध्यान रखना होगा कि उनका कोई भी कार्य सेवा की निष्पक्षता, अनुशासन, गोपनीयता, सुरक्षा अथवा रेलवे की सार्वजनिक छवि को प्रभावित न करे।
इस लेख का उद्देश्य किसी कर्मचारी को भयभीत करना नहीं है, बल्कि उसे उसके अधिकारों और दायित्वों की सही जानकारी देना है। यदि नियमों की सही समझ हो, तो सोशल मीडिया का उपयोग पूरी जिम्मेदारी और आत्मविश्वास के साथ किया जा सकता है।
इस लेख में हम विशेष रूप से निम्नलिखित महत्वपूर्ण नियमों को सरल भाषा में समझेंगे—
भारतीय रेल एक सार्वजनिक सेवा संगठन है। इसका प्रत्येक कर्मचारी अपने पद की शपथ के अनुरूप निष्पक्षता, ईमानदारी और तटस्थता बनाए रखने के लिए बाध्य है। इसी उद्देश्य से Railway Services (Conduct) Rules, 1966 में Rule 5 का प्रावधान किया गया है।
इस नियम का उद्देश्य रेलवे कर्मचारी के व्यक्तिगत राजनीतिक विचारों को नियंत्रित करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि वह अपने सरकारी पद का उपयोग किसी राजनीतिक दल, उम्मीदवार या राजनीतिक आंदोलन के समर्थन अथवा विरोध के लिए न करे। सरकारी सेवा की विश्वसनीयता तभी बनी रह सकती है जब जनता को विश्वास हो कि सरकारी कर्मचारी राजनीतिक रूप से निष्पक्ष होकर अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं।
आज चुनावी प्रचार का सबसे बड़ा माध्यम सोशल मीडिया बन चुका है। Facebook पोस्ट, X पर अभियान, Instagram Reel, YouTube Live तथा WhatsApp संदेशों के माध्यम से व्यापक राजनीतिक प्रचार किया जाता है। ऐसी स्थिति में रेलवे कर्मचारी को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
यदि कोई रेलवे कर्मचारी—
तो ऐसी गतिविधियाँ Rule 5 के उल्लंघन का विषय बन सकती हैं। ऐसे मामलों में संबंधित प्राधिकारी उपलब्ध तथ्यों, साक्ष्यों तथा लागू नियमों के आधार पर कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई प्रारम्भ कर सकता है।
बिल्कुल नहीं।
प्रत्येक रेलवे कर्मचारी, अन्य नागरिकों की तरह, संविधान द्वारा प्रदत्त मतदान के अधिकार का उपयोग कर सकता है। Conduct Rules मतदान करने से नहीं रोकते। प्रतिबंध केवल सक्रिय राजनीतिक भागीदारी पर है, न कि लोकतांत्रिक अधिकारों के प्रयोग पर।
यदि कोई कर्मचारी संविधान, चुनाव प्रक्रिया, लोकतंत्र, संसद, विधि या सार्वजनिक नीति पर शैक्षणिक अथवा तथ्यात्मक जानकारी साझा करता है, तो उसे हर स्थिति में Rule 5 का उल्लंघन नहीं माना जाएगा।
लेकिन यदि पोस्ट का उद्देश्य किसी राजनीतिक दल, उम्मीदवार या चुनाव प्रचार को बढ़ावा देना है, तो स्थिति अलग होगी। इसलिए प्रत्येक कर्मचारी को पोस्ट करने से पहले उसकी भाषा, उद्देश्य और संभावित प्रभाव पर अवश्य विचार करना चाहिए।
बहुत से कर्मचारी यह सोचते हैं कि "यह मेरा व्यक्तिगत Facebook Account है, इसलिए Conduct Rules लागू नहीं होंगे।"
यह धारणा पूरी तरह सही नहीं है। यदि आपकी सार्वजनिक गतिविधि आपकी सरकारी सेवा, आपके पद या सेवा की निष्पक्षता से जुड़ती है, तो केवल "Personal Account" होना आपको नियमों से मुक्त नहीं कर देता।
इसलिए सोशल मीडिया पर कोई भी राजनीतिक पोस्ट करने से पहले स्वयं से एक प्रश्न अवश्य पूछें—
"क्या इस पोस्ट से मेरी राजनीतिक निष्पक्षता पर प्रश्न उठ सकता है?"
यदि उत्तर "हाँ" है, तो ऐसी पोस्ट करने से बचना ही अधिक उचित होगा।
सोशल मीडिया के संबंध में रेलवे कर्मचारियों द्वारा सबसे अधिक पूछा जाने वाला प्रश्न यह है—
इन प्रश्नों का उत्तर केवल "हाँ" या "नहीं" में नहीं दिया जा सकता। इसका उत्तर Railway Services (Conduct) Rules, 1966 के Rule 8 तथा समय-समय पर रेलवे बोर्ड द्वारा जारी स्पष्टीकरणों को समझने के बाद ही दिया जा सकता है।
Rule 8 का मूल उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई रेलवे कर्मचारी बिना आवश्यक अनुमति के किसी समाचार-पत्र, पत्रिका, प्रेस या अन्य मीडिया के संपादन (Editing), प्रबंधन (Management) अथवा संचालन (Conduct) में इस प्रकार भाग न ले जिससे उसकी सरकारी जिम्मेदारियाँ प्रभावित हों या यह लगे कि वह रेलवे प्रशासन की ओर से आधिकारिक रूप से बोल रहा है।
बाद में नियमों में Electronic Media को भी शामिल किया गया। आज के डिजिटल युग में YouTube, Blog, Podcast तथा अन्य ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म को समझते समय इसी सिद्धांत को आधार माना जाता है।
नहीं। केवल YouTube Channel, Blog या Website होना अपने-आप में Conduct Rules का उल्लंघन नहीं है।
लेकिन इसका अर्थ यह भी नहीं है कि रेलवे कर्मचारी किसी भी प्रकार की सामग्री बिना किसी जिम्मेदारी के प्रकाशित कर सकता है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आप क्या प्रकाशित कर रहे हैं, किस उद्देश्य से कर रहे हैं और क्या उससे Railway Services (Conduct) Rules का कोई उल्लंघन तो नहीं हो रहा।
यदि कोई कर्मचारी—
प्रतियोगी परीक्षाओं का मार्गदर्शन देता है,
सामान्य शिक्षा से जुड़े वीडियो बनाता है,
विज्ञान, इतिहास, साहित्य, स्वास्थ्य या व्यक्तित्व विकास पर सामग्री प्रकाशित करता है,
सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रेलवे नियमों, Railway Board Circulars, RBE, Manuals या Codes की शैक्षणिक व्याख्या करता है,
तो ऐसी गतिविधियाँ सामान्यतः अलग प्रकृति की होती हैं।
लेकिन यहाँ भी एक महत्वपूर्ण सावधानी आवश्यक है।
यदि आप रेलवे नियमों की व्याख्या कर रहे हैं, तो यह स्पष्ट करना उचित होगा कि—
"यह जानकारी केवल शैक्षणिक उद्देश्य से दी जा रही है। व्यक्त विचार लेखक के निजी अध्ययन पर आधारित हैं। इसे रेलवे प्रशासन की आधिकारिक व्याख्या या आदेश न माना जाए।"
ऐसा Disclaimer पाठकों के लिए भी उपयोगी होता है और यह स्पष्ट करता है कि आप किसी अधिकृत प्रवक्ता (Official Spokesperson) के रूप में नहीं बोल रहे हैं।
Rule 8 तथा अन्य संबंधित Conduct Rules की भावना के अनुसार रेलवे कर्मचारी को निम्न कार्यों से बचना चाहिए—
रेलवे प्रशासन की ओर से आधिकारिक घोषणा करना।
स्वयं को रेलवे का अधिकृत प्रवक्ता बताना।
गोपनीय या अप्रकाशित जानकारी को मीडिया या सोशल मीडिया के माध्यम से प्रसारित करना।
कार्यालय के भीतर की गोपनीय बैठकों, फाइलों या संवेदनशील चर्चाओं को सार्वजनिक करना।
ऐसा कंटेंट प्रकाशित करना जिससे यह भ्रम उत्पन्न हो कि यह रेलवे की आधिकारिक नीति या निर्णय है।
यदि ऐसा किया जाता है, तो मामला केवल Rule 8 तक सीमित नहीं रहेगा। परिस्थितियों के अनुसार Rule 11 (Communication of Official Information) तथा अन्य लागू नियम भी प्रभावी हो सकते हैं।
आज Reels और Shorts का चलन बहुत बढ़ गया है। कई बार कर्मचारी ड्यूटी के दौरान स्टेशन, कंट्रोल ऑफिस, केबिन, यार्ड, लोको या अन्य कार्यस्थलों पर वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर देते हैं।
यदि इससे—
ड्यूटी प्रभावित होती है,
सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित होती है,
यात्रियों की सुरक्षा से समझौता होता है,
अथवा संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक होती है,
तो यह गंभीर विषय बन सकता है।
रेलवे कर्मचारी का पहला दायित्व उसकी ड्यूटी है, न कि सोशल मीडिया के लिए सामग्री तैयार करना।
यह प्रश्न भी अक्सर पूछा जाता है।
यदि कोई YouTube Channel, Blog, Website या अन्य डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म केवल ज्ञान साझा करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उससे नियमित आय (Monetization), Sponsorship, Paid Promotion या व्यावसायिक गतिविधि जुड़ी हुई है, तो केवल Rule 8 देखना पर्याप्त नहीं होगा।
ऐसी स्थिति में Railway Services (Conduct) Rules के अन्य प्रासंगिक प्रावधान, जैसे निजी व्यापार या अन्य रोजगार (Private Trade/Employment) से संबंधित नियम, भी लागू हो सकते हैं। प्रत्येक मामले का निर्णय उसकी वास्तविक परिस्थितियों और लागू नियमों के अनुसार किया जाएगा।
इसलिए यदि कोई कर्मचारी सोशल मीडिया को नियमित आय का स्रोत बनाना चाहता है, तो उसे पहले संबंधित नियमों और आवश्यक अनुमति (जहाँ लागू हो) की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लेनी चाहिए।
मान लीजिए एक रेलवे कर्मचारी "Railway Rules Explained" नाम से YouTube Channel चलाता है। वह केवल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध Railway Board Circulars, Establishment Rules, Codes और Manuals के आधार पर कर्मचारियों को नियम समझाता है। वह किसी गोपनीय दस्तावेज़ का उपयोग नहीं करता, रेलवे की ओर से आधिकारिक घोषणा नहीं करता और प्रत्येक वीडियो में स्पष्ट करता है कि यह उसका व्यक्तिगत अध्ययन है।
दूसरी ओर, यदि कोई कर्मचारी कार्यालय की नोटशीट, अप्रकाशित आदेश, गोपनीय पत्र या विभागीय फाइलों की फोटो YouTube, Facebook या Telegram पर डालता है, तो यह केवल जानकारी साझा करना नहीं, बल्कि गंभीर सेवा-आचरण का विषय बन सकता है।
दोनों परिस्थितियों में अंतर समझना अत्यंत आवश्यक है।
Rule 8 का उद्देश्य कर्मचारियों को शिक्षा, लेखन, अध्ययन या ज्ञान साझा करने से रोकना नहीं है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि—
रेलवे की गोपनीय जानकारी सुरक्षित रहे।
कर्मचारी स्वयं को रेलवे का अधिकृत प्रवक्ता प्रस्तुत न करे।
मीडिया या सोशल मीडिया के उपयोग से सेवा की निष्पक्षता, गोपनीयता और रेलवे की प्रतिष्ठा प्रभावित न हो।
यदि सोशल मीडिया से नियमित आय या व्यावसायिक गतिविधि जुड़ती है, तो संबंधित अन्य Conduct Rules का भी पालन किया जाए।
याद रखें—
ज्ञान साझा करना एक बात है, लेकिन रेलवे की ओर से आधिकारिक जानकारी जारी करना बिल्कुल अलग बात है।
यही अंतर समझ लेना Rule 8 को सही अर्थों में समझने की कुंजी है।
सोशल मीडिया के युग में रेलवे कर्मचारियों द्वारा अक्सर यह प्रश्न पूछा जाता है—
इन प्रश्नों का उत्तर समझने के लिए Railway Services (Conduct) Rules, 1966 के Rule 9 को समझना आवश्यक है।
Rule 9 का उद्देश्य रेलवे कर्मचारी की अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता समाप्त करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि वह अपने सार्वजनिक वक्तव्य, लेख, भाषण, वीडियो या सोशल मीडिया पोस्ट के माध्यम से ऐसा कोई कार्य न करे जिससे—
भारत सरकार के प्रति सार्वजनिक विश्वास प्रभावित हो।
रेलवे प्रशासन की निष्पक्षता पर प्रश्न उठे।
सरकारी सेवा की गरिमा को ठेस पहुँचे।
अनुशासन एवं प्रशासनिक व्यवस्था प्रभावित हो।
आज के समय में Facebook Post, X Post, YouTube Video, Instagram Reel, Blog, Podcast तथा सार्वजनिक Telegram या WhatsApp Channel पर प्रकाशित सामग्री भी परिस्थितियों के अनुसार इसी दृष्टि से देखी जा सकती है।
नहीं।
यदि किसी रेलवे कर्मचारी को ड्यूटी, कार्यस्थल, सुरक्षा, वेतन, पदोन्नति, स्थानांतरण या अन्य सेवा संबंधी कोई वास्तविक समस्या है, तो उसे अपनी बात रखने का अधिकार है।
लेकिन उसका उचित माध्यम विभाग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया है, जैसे—
Representation (प्रतिनिधित्व)
Appeal (अपील)
Review / Revision (जहाँ लागू हो)
विभागीय शिकायत निवारण प्रणाली
मान्यता प्राप्त कर्मचारी संगठन (जहाँ लागू हो)
सोशल मीडिया विभागीय शिकायत निवारण का अधिकृत मंच नहीं है।
यदि कोई कर्मचारी सोशल मीडिया पर—
वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध अपमानजनक भाषा का प्रयोग करता है।
बिना प्रमाण गंभीर आरोप लगाता है।
विभागीय जांच पूरी होने से पहले किसी अधिकारी को दोषी घोषित करता है।
रेलवे प्रशासन के विरुद्ध भड़काऊ अभियान चलाता है।
झूठी, भ्रामक या अपुष्ट जानकारी फैलाता है।
तो ऐसी स्थिति Rule 9 सहित अन्य लागू Conduct Rules के अंतर्गत विभागीय कार्रवाई का आधार बन सकती है।
यही सबसे महत्वपूर्ण बिंदु है, जिसे प्रत्येक रेलवे कर्मचारी को समझना चाहिए।
"इस स्टेशन पर यात्रियों के लिए पेयजल की व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है।"
यह एक तथ्यात्मक एवं रचनात्मक सुझाव है।
"रेलवे के अधिकारी निकम्मे हैं, उन्हें काम करना नहीं आता।"
यह अपमानजनक और असंयमित टिप्पणी है।
"रेलवे प्रशासन पूरी तरह भ्रष्ट है, कोई भी नियम नहीं मानता।"
यदि ऐसा आरोप बिना प्रमाण सार्वजनिक रूप से लगाया जाता है, तो यह गंभीर परिणाम उत्पन्न कर सकता है।
इसलिए आलोचना यदि करनी हो तो तथ्यों, शालीन भाषा और उचित माध्यम के साथ की जानी चाहिए।
डिजिटल युग में सबसे अधिक सावधानी जिस Rule में अपेक्षित है, वह Rule 11 है।
रेलवे कर्मचारी अपने कार्य के दौरान अनेक प्रकार की जानकारी प्राप्त करता है, जैसे—
कार्यालयी पत्र (Office Orders)
नोटशीट (Note Sheets)
गोपनीय पत्राचार
जांच रिपोर्ट
दुर्घटना से संबंधित प्रारंभिक रिपोर्ट
सुरक्षा निर्देश
कंट्रोल ऑफिस की जानकारी
विभागीय फाइलें
संवेदनशील फोटो एवं वीडियो
इनमें से अनेक सूचनाएँ केवल विभागीय उपयोग के लिए होती हैं।
यदि कर्मचारी को ऐसा करने का अधिकार नहीं है, तो उत्तर है—नहीं।
कोई भी कर्मचारी बिना अनुमति—
गोपनीय पत्र,
नोटशीट,
जांच रिपोर्ट,
सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित जानकारी,
अप्रकाशित आदेश,
विभागीय फाइल,
को Facebook, WhatsApp, Telegram, YouTube या अन्य सार्वजनिक माध्यम पर साझा नहीं कर सकता।
यदि ऐसा किया जाता है, तो यह Rule 11 के उल्लंघन का विषय बन सकता है और संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
नहीं।
यही सबसे बड़ी गलतफहमी है।
यदि कोई Circular, RBE, Code, Manual या अन्य आदेश पहले से ही सार्वजनिक डोमेन में उपलब्ध है, तो उसका अध्ययन करना, उसका संदर्भ देना या उसकी शैक्षणिक व्याख्या करना अलग बात है।
लेकिन—
अप्रकाशित दस्तावेज़,
केवल विभागीय उपयोग के लिए जारी पत्र,
गोपनीय या संवेदनशील रिकॉर्ड,
को सार्वजनिक करना उचित नहीं है।
यदि कोई कर्मचारी अपने YouTube Channel पर Railway Services (Conduct) Rules की व्याख्या करता है और केवल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नियमों एवं Railway Board Circulars का उपयोग करता है, तो यह स्थिति उस कर्मचारी से अलग है जो कार्यालय की गोपनीय फाइलों की फोटो अपलोड करता है।
यही अंतर Rule 11 का मूल आधार है।
Railway Services (Conduct) Rules का एक महत्वपूर्ण सिद्धांत यह भी है कि रेलवे कर्मचारी अपने सेवा संबंधी मामलों के समाधान के लिए अनुचित राजनीतिक या बाहरी प्रभाव का सहारा न ले।
यदि किसी कर्मचारी का—
स्थानांतरण,
पदोन्नति,
विभागीय जांच,
अनुशासनात्मक मामला,
या अन्य सेवा विषय
विचाराधीन है, तो उसका समाधान विभाग द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार होना चाहिए।
यदि कोई कर्मचारी ऐसे मामलों में किसी मंत्री, सांसद, विधायक, राजनीतिक दल या अन्य प्रभावशाली व्यक्ति के माध्यम से अनुचित दबाव बनाने का प्रयास करता है, तो यह Conduct Rules की भावना के विपरीत माना जा सकता है।
आज सोशल मीडिया पर भी कई बार कर्मचारी किसी जनप्रतिनिधि को टैग करके अपने सेवा मामलों में सार्वजनिक दबाव बनाने का प्रयास करते हैं। प्रत्येक मामले के तथ्य अलग हो सकते हैं, इसलिए हर स्थिति का निर्णय उसके तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर किया जाएगा। लेकिन सामान्य सिद्धांत यही है कि सेवा संबंधी विवादों का समाधान विभागीय प्रक्रिया से ही किया जाना चाहिए।
इन तीनों नियमों का उद्देश्य अलग-अलग होते हुए भी उनका मूल संदेश एक ही है—
Rule 9 — सार्वजनिक अभिव्यक्ति में संयम रखें।
Rule 11 — आधिकारिक एवं गोपनीय जानकारी की सुरक्षा करें।
Rule 20 — सेवा मामलों में अनुचित राजनीतिक या बाहरी प्रभाव का सहारा न लें।
यदि रेलवे कर्मचारी इन तीनों सिद्धांतों का पालन करता है, तो वह सोशल मीडिया का उपयोग जिम्मेदारी, मर्यादा और नियमों के अनुरूप कर सकता है।
ऊपर वर्णित Rule 5, Rule 8, Rule 9, Rule 11 तथा Rule 20 का अध्ययन करने के बाद यह स्पष्ट हो जाता है कि Railway Services (Conduct) Rules, 1966 का उद्देश्य रेलवे कर्मचारियों को सोशल मीडिया से दूर रखना नहीं है। इन नियमों का उद्देश्य केवल यह सुनिश्चित करना है कि कर्मचारी सोशल मीडिया का उपयोग जिम्मेदारी, निष्पक्षता, अनुशासन और गोपनीयता के साथ करें।
समय के साथ सूचना प्रौद्योगिकी में तेजी से परिवर्तन हुआ है। जब Railway Services (Conduct) Rules, 1966 बनाए गए थे, तब सोशल मीडिया का अस्तित्व नहीं था। इसलिए बाद के वर्षों में Electronic Media तथा सार्वजनिक संचार (Public Communication) से संबंधित विषयों पर रेलवे बोर्ड एवं भारत सरकार द्वारा समय-समय पर आवश्यक स्पष्टीकरण और निर्देश जारी किए गए।
इसी कारण किसी भी नियम की व्याख्या करते समय केवल मूल Rule पढ़ना पर्याप्त नहीं है। जहाँ उपलब्ध हों, वहाँ Railway Board के संशोधन, स्पष्टीकरण तथा भारत सरकार (DoPT) के प्रासंगिक निर्देशों को भी साथ में देखना चाहिए।
महत्वपूर्ण: यदि भविष्य में Railway Board या भारत सरकार सोशल मीडिया, YouTube, Blog या अन्य डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म के संबंध में नया निर्देश जारी करती है, तो वही नवीनतम निर्देश प्रभावी माना जाएगा।
एक रेलवे कर्मचारी YouTube पर रेलवे नियमों की जानकारी देता है। वह केवल सार्वजनिक रूप से उपलब्ध Railway Board Circulars, RBE, Manuals एवं Conduct Rules का अध्ययन कर उनकी सरल भाषा में व्याख्या करता है। वह किसी गोपनीय दस्तावेज़ का उपयोग नहीं करता और स्वयं को रेलवे का अधिकृत प्रवक्ता भी नहीं बताता।
ऐसी स्थिति, सामान्यतः, उस कर्मचारी से भिन्न होगी जो गोपनीय दस्तावेज़ या अप्रकाशित जानकारी सार्वजनिक करता है। फिर भी प्रत्येक मामले का मूल्यांकन उसके तथ्यों और लागू नियमों के आधार पर किया जाएगा।
यदि कोई कर्मचारी कार्यालय की नोटशीट, जांच रिपोर्ट, गोपनीय पत्र या अप्रकाशित आदेश की फोटो Facebook, WhatsApp, Telegram या YouTube पर अपलोड करता है, तो यह Rule 11 सहित अन्य लागू नियमों के अंतर्गत गंभीर विषय बन सकता है और विभागीय कार्रवाई की जा सकती है।
यदि कोई रेलवे कर्मचारी अपने सरकारी पद का उल्लेख करते हुए किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार के पक्ष में सोशल मीडिया पर प्रचार करता है, लोगों से वोट माँगता है या चुनाव अभियान का सक्रिय हिस्सा बनता है, तो यह Rule 5 के अंतर्गत विभागीय कार्रवाई का आधार बन सकता है।
यदि कोई कर्मचारी बिना तथ्यात्मक आधार के सोशल मीडिया पर वरिष्ठ अधिकारियों के विरुद्ध अपमानजनक, अशोभनीय या भड़काऊ टिप्पणी करता है, तो यह Rule 9 सहित अन्य लागू Conduct Rules के उल्लंघन का विषय हो सकता है।
✔ Railway Services (Conduct) Rules, 1966 का अध्ययन करें।
✔ सोशल मीडिया पर शालीन एवं जिम्मेदार भाषा का प्रयोग करें।
✔ केवल प्रमाणित एवं सार्वजनिक रूप से उपलब्ध जानकारी ही साझा करें।
✔ रेलवे की गोपनीय एवं संवेदनशील जानकारी सुरक्षित रखें।
✔ यदि रेलवे नियमों की जानकारी दे रहे हैं, तो विश्वसनीय स्रोतों का उल्लेख करें।
✔ सेवा संबंधी शिकायतों के लिए विभागीय प्रक्रिया का पालन करें।
✔ पोस्ट या वीडियो प्रकाशित करने से पहले एक बार स्वयं समीक्षा अवश्य करें।
✘ किसी राजनीतिक दल या उम्मीदवार का प्रचार न करें।
✘ रेलवे की गोपनीय फाइलें, नोटशीट या अप्रकाशित आदेश साझा न करें।
✘ स्वयं को रेलवे का अधिकृत प्रवक्ता बताकर जानकारी जारी न करें।
✘ अधिकारियों या सहकर्मियों के विरुद्ध अपमानजनक भाषा का प्रयोग न करें।
✘ सोशल मीडिया पर अफवाह, अपुष्ट या भ्रामक जानकारी साझा न करें।
✘ सेवा मामलों में अनुचित राजनीतिक या बाहरी प्रभाव का सहारा न लें।
✘ ड्यूटी के दौरान ऐसा वीडियो या लाइव प्रसारण न करें जिससे सुरक्षा या कार्य प्रभावित हो।
किसी भी पोस्ट, वीडियो, Reel, Blog या Podcast को प्रकाशित करने से पहले स्वयं से ये पाँच प्रश्न अवश्य पूछें—
1. क्या यह जानकारी सार्वजनिक है या गोपनीय?
2. क्या मैं यह सामग्री एक जिम्मेदार रेलवे कर्मचारी के रूप में प्रकाशित कर रहा हूँ?
3. क्या इससे Railway Services (Conduct) Rules का कोई उल्लंघन तो नहीं होगा?
4. क्या मेरी भाषा तथ्यात्मक, संतुलित और मर्यादित है?
5. यदि मेरे वरिष्ठ अधिकारी या विभाग इस पोस्ट को देखें, तो क्या मैं इसे नियमों के आधार पर उचित ठहरा सकूँगा?
यदि इन पाँचों प्रश्नों का उत्तर सकारात्मक है, तो सामग्री प्रकाशित करने का निर्णय अधिक सुरक्षित और जिम्मेदार माना जा सकता है।
सोशल मीडिया आज ज्ञान साझा करने, संवाद स्थापित करने और समाज को जागरूक करने का प्रभावशाली माध्यम है। रेलवे कर्मचारी भी इसका उपयोग कर सकते हैं, लेकिन उन्हें सदैव यह स्मरण रखना चाहिए कि वे भारत सरकार के कर्मचारी हैं और उनके सार्वजनिक आचरण से रेलवे की छवि भी जुड़ी होती है।
Railway Services (Conduct) Rules, 1966 का उद्देश्य प्रतिबंध लगाना नहीं, बल्कि जिम्मेदार आचरण सुनिश्चित करना है। यदि कर्मचारी राजनीतिक निष्पक्षता, गोपनीयता, अनुशासन, शालीन भाषा और सेवा की गरिमा का पालन करते हुए सोशल मीडिया का उपयोग करता है, तो वह नियमों के अनुरूप और सुरक्षित रूप से डिजिटल माध्यमों का उपयोग कर सकता है।
यह लेख Railway Services (Conduct) Rules, 1966, उपलब्ध सार्वजनिक Railway Board Circulars तथा संबंधित सरकारी निर्देशों के अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य केवल जागरूकता और सामान्य जानकारी प्रदान करना है। किसी विशेष मामले में संबंधित नियम, नवीनतम संशोधन, रेलवे बोर्ड के आदेश तथा सक्षम प्राधिकारी का निर्णय ही अंतिम रूप से मान्य होगा।
Railway Services (Conduct) Rules, 1966 (यथासंशोधित)
Railway Board द्वारा समय-समय पर जारी संशोधन एवं स्पष्टीकरण
भारत सरकार (DoPT) के प्रासंगिक Office Memoranda (जहाँ लागू हों)
भारतीय रेल के आधिकारिक Manuals, Codes एवं सार्वजनिक Circulars
रेलवे में ड्यूटी के दौरान किसी कर्मचारी का शराब, नशीली दवा अथवा अन्य मादक पदार्थ के प्रभाव में होना केवल कर्मचारी के व्यक्तिगत आचरण अथवा अनुशासन से संबंधित विषय नहीं है। विशेष रूप से ट्रेन संचालन, सिग्नलिंग, परिचालन, रखरखाव तथा अन्य सुरक्षा-संवेदनशील कार्यों में यह सीधे रेलवे सुरक्षा से संबंधित गंभीर विषय है।
यदि कोई रेल कर्मचारी ड्यूटी के दौरान नशे की स्थिति में पाया जाता है अथवा उसके नशे में होने का उचित संदेह उत्पन्न होता है, तो संबंधित In-charge, Supervisor अथवा Controlling Officer को तत्काल सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
भारतीय रेलवे ने कर्मचारियों के लिए Human Resource Management System (HRMS) के माध्यम से e-Pass एवं e-PTO (Privilege Ticket Order) की ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध कराई है। इसका उद्देश्य रेलवे कर्मचारियों को Pass जारी करने और Reservation कराने की प्रक्रिया को अधिक सरल, पारदर्शी एवं सुविधाजनक बनाना है।
पहले Pass एवं PTO कागजी रूप में जारी किए जाते थे, जिसके लिए कर्मचारियों को कार्यालय जाना पड़ता था। इसके बाद Reservation कराने के लिए रेलवे आरक्षण काउंटर पर भी जाना पड़ता था। लेकिन अब अधिकांश मामलों में यह पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन उपलब्ध है, जिससे कर्मचारी घर बैठे ही e-Pass/e-PTO Generate कर सकते हैं तथा पात्रता के अनुसार IRCTC के माध्यम से Reservation भी करा सकते हैं।
फिर भी अनेक कर्मचारियों के मन में कई प्रश्न रहते हैं, जैसे—
यदि आपके मन में भी ऐसे प्रश्न हैं, तो यह लेख आपके लिए एक संपूर्ण मार्गदर्शिका है। इसमें HRMS से e-Pass/e-PTO Generate करने से लेकर IRCTC पर ऑनलाइन Reservation, सामान्य समस्याओं के समाधान तथा आवश्यक सावधानियों तक की पूरी जानकारी सरल भाषा में दी गई है।
महत्वपूर्ण सूचना: HRMS, IRCTC तथा रेलवे बोर्ड समय-समय पर अपनी ऑनलाइन प्रक्रिया एवं नियमों में परिवर्तन कर सकते हैं। इसलिए यदि किसी स्क्रीन, विकल्प या प्रक्रिया में बदलाव दिखाई दे, तो नवीनतम आधिकारिक निर्देशों का पालन करें।
भारतीय रेलवे अपने कर्मचारियों को निर्धारित नियमों के अनुसार यात्रा सुविधा प्रदान करने के लिए Privilege Pass तथा Privilege Ticket Order (PTO) जारी करता है।
डिजिटल व्यवस्था लागू होने के बाद अधिकांश रेलवे में इन्हें HRMS आधारित e-Pass एवं e-PTO के रूप में जारी किया जा रहा है।