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6/09/2021

Index- First Aid

 First Aid  - जलना और झुलसना 

First Aid  - मिर्गी का दौरे 

First Aid - सांप, मधुमक्खी, पागल कुत्ते का काटना 

First Aid  - सदमा (आघात)

First Aid  - Do's During Heart Attack

First Aid  - फर्स्ट एड बाक्स 

First Aid  - Nose Bleeding

First Aid   - घाव और रक्त  स्राव होने पर

First Aid - Snake Bite

First Aid - Burns

First Aid  - विष/जहर

First Aid  - रोगियों को ले जाने की विधियाँ

First Aid - Heavy Bleeding

First Aid - उदेश्य एवं सिद्धांत

First Aid -  कुछ विशेष  जानकारी 

First Aid  - हड्डियों की टूट और जोड़ो की चोट 

प्राथमिक चिकित्सा  (First Aid) - परिचय  / प्रस्तावना  

First Aid - प्राथमिक सहायता देने वाले के आवश्यक गुण 

First Aid  - शरीर के महत्वपूर्ण संस्थान 

First Aid  - आँख / कान / नाक में किसी बाहरी वास्तु के चले जाने पर 

First Aid  - शरीर रचना 

First Aid - बिजली का झटका 

1/07/2021

First Aid - बिजली का झटका

आज के  युग में बिजली का प्रयोग हर घर में, वर्कशॉप, कारखानों, दफ्तरों, दुकानों में सब जगह होता है और इससे हमे बहुत लाभ होता है।लेकिन यह इतनी खतरनाक है कि जब हम लापरवाही और नासमझी से प्रयोग करते है तो हर वर्ष हजारो जाने इसी  वजह से चली जाती है।
बिजली तीन प्रकार की होती है -
1. A.C. Current
2. D.C. Current
3. Lightning - अर्थात  बादलो से  गिरने वाली

First Aid - शरीर रचना

प्राथमिक सहायक को शरीर की रचना और क्रिया का कुछ ज्ञान आवश्यक है या शरीर की रचना और क्रिया की जानकारी के बिना वह ठीक प्रकार से घायल की  सहायता नही कर सकता।शरीर के मुख्य अंग जिनकी स्थिति का ज्ञान होना चाहिए वे है  - मस्तिष्क , फेफड़े,और हृदय
शरीर के संस्थान - शरीर की रचना और क्रिया के अध्ययन के लिए सारे शरीर को संस्थाओ में बांटते है।
शरीर के उन अंगो के समूह को संस्थान कहते है जो मिलकर एक ही प्रकार का कार्य करते है शरीर के मुख्य संस्थान इस प्रकार है -

First Aid - आँख / कान / नाक में किसी बाहरी वास्तु के चले जाने पर

जैसे पत्थर, कंकर, कोयला, मिट्टी, गर्द, कीड़ा,मच्छर, कांच का टुकड़ा या हाथ की अंगुली आदि आँख में लग जाती है तो अधिक दर्द, बैचेनी, लाली और आंख में पानी आने लगता है ।

फर्स्ट ऐड 

1. आँख शरीर का कोमल अंग है इसलिए इनको कभी भी मलना नही चाहिए और  बच्चो के मामले मे तो उनके हाथ तक  बाँध दे तो अच्छा  है मलने से आँख में घाव होने का डर रहता है ।
2. साफ रूमाल या मलमल के कपड़े के टुकड़े को गीला करके पहले ऊपर वाली पलको को साफ हाथ में पलटकर रोगी को नीचे की ओर देखने के लिए कहे और साफ कर दे यदि फिर भी आराम न मिले तो नीचे वाली पलको को इसी प्रकार साफ करे ।

First Aid - शरीर के महत्वपूर्ण संस्थान

यदि किसी को अचानक शरीर पर कही भी चोट, खरोच या रगड लग जाती है तो उस जगह पर लाल रंग का द्रव्य पदार्थ निकलने लगता है जो रक्त या ब्लड कहलाता है।
प्रत्येक मनुष्य के शरीर में साढ़े पांच से छ: लीटर के बीच रक्त होता है।यह रक्त शरीर में चारो तरफ शरीर के अंगो को ऑक्सीजन और पोषक तत्व पहुंचता है और उन्हें जिन्दा रखता है एस रक्त के संचार में हृदय, धमनियाँ, शिराए और कोशिकाए कार्य करती है।
हृदय - हृदय को हम दुसरा नाम दिल से भी जानते है।कई बार बातचीत में अक्सर यह कहते है हुए सुनते है की मेरा दिल कह रहा है, मेरा दिल सोच रहा था, मेरा दिल उस पर आ गया, मेरा दिल टूट गया। वास्तव में आम लोग दिल को सोचने समझने का एक अंग समझते है जो की पूरी तरह गलत है। सोचने और समझने का कार्य हमारा दिल नही वरन हमारा मस्तिष्क करता है ।शरीर के सभी अंगो पर मस्तिष्क का नियंत्रण रहता है।

First Aid - प्राथमिक सहायता देने वाले के आवश्यक गुण

प्राथमिक उपचार करनेवाले व्यक्ति के गुण
  1. विवेकी (observant) - वह विवेकी , सचेत, निपुण एवं परिश्रमी होना चाहिए । जिससे वह दुर्घटना के चिन्ह पहचान सके;
  2.  व्यवहारकुशल (tactful) - उसे संवेदनशील होना चाहिए । जिससे घटना संबंधी जानकारी जल्द से जल्द प्राप्त करते हुए वह रोगी का विश्वास प्राप्त करे। वह दयालु होना चाहिए अर्थात् उसके दिल में लोगो के लिए दया होनी चाहिए ।
  3.  युक्तिपूर्ण (resourceful), जिससे वह निकटतम साधनों का उपयोग कर प्रकृति का सहायक बने;
  4. निपुण (dexterous) - उसकी प्राथमिक सहायता देने का ज्ञान होना चाहिए । जिससे वह ऐसे उपायों को काम में लाए कि रोगी को उठाने इत्यादि में कष्ट न हो;

प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) - परिचय / प्रस्तावना

किसी रोग के होने या चोट लगने पर किसी अप्रशिक्षित व्यक्ति द्वारा जो सीमित उपचार किया जाता है उसे प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) कहते हैं। इसका उद्देश्य कम से कम साधनों में इतनी व्यवस्था करना होता है कि चोटग्रस्त व्यक्ति को सम्यक इलाज कराने की स्थिति में लाने में लगने वाले समय में कम से कम नुकसान हो। अतः प्राथमिक चिकित्सा प्रशिक्षित या अप्रशिक्षित व्यक्तिओं द्वारा कम से कम साधनों में किया गया सरल उपचार है। कभी-कभी यह जीवन रक्षक भी सिद्ध होता है।

प्राथमिक चिकित्सा विद्या प्रयोगात्मक चिकित्सा के मूल सिद्धांतों पर निर्भर है। इसका ज्ञान शिक्षित पुरुषों को इस योग्य बनाता है कि वे आकस्मिक दुर्घटनाया बीमारी के अवसर पर, चिकित्सक के आने तक या रोगी को सुरक्षित स्थान पर ले जाने तक, उसके जीवन को बचाने, रोगनिवृत्ति में सहायक होने, या घाव की दशा और अधिक निकृष्ट होने से रोकने में उपयुक्त सहायता कर सकें।

मनुष्य का जीवन अति मूल्यवान और महत्वपूर्ण है आज का युग अति तेज एवं गति पूर्ण है चारो तरफ सभी को शीध्रता एवं उत्तेजना के साथ कार्य करने की आदत पड़ गयी है जनसंख्या के तेजी से बढ़ने के कारण चारो तरफ सडको, बसों, रेलों, स्कूलों में भीड़ सी दिखाई पड़ती है आवागमन के साधन बेहिसाब बढ़ रहे है, और वाहनों की गति भी अत्यधिक होने के कारण रोज ही अखबारों में किसी ना किसी दुर्घटना के होने के समाचार अवश्य पढने को मिलते है अधिकांश मनुष्य समय पर प्राथमिक सहायता न मिलने कारण काल के मुंह में समा जाते है ।

राजनीतिक उथल - पुथल पूरे संसार में हो रही है कोई भी देश किसी भी देश पर आक्रमण करके वहां के निर्दोष नागरिको को मर डालता है आतंकवाद भी इसका एक हिस्सा है जसके कारण कई निर्दोष मनुष्य उनकी हिंसा के शिकार हो जाते है इसके अलावा बाढ़ और सुनामी भी मानव जीवन के लिए जानलेवा हो जाती है ।

उपरोक्त सभी बातो से कई लोग प्रभावित होते है परन्तु इनमे से कई जाने बचायी जा सकती है अगर इनको समय पर प्राथमिक सहायता उपलब्ध हो जाए ।

फर्स्ट एड का मतलब है प्राथमिक सहायता वह सहायता जो किसी आकस्मिक दुर्घटना के समय पीड़ित या रोगी के जीवन रक्षा के लिए शीघ्र और सही सहायता डॉक्टर के पास या अस्पताल पहुँचने के बीच की जाती है ।

आम इंसान किसी की जान तभी बचा सकता है जब उसको प्राथमिक सहायता देने का ज्ञान हो आप भी किसी की जान अवश्य बचा सकते है यदि आप इसकी जानकारी रखेगे जब भी कोई दुर्घटना होती है तो पीडित मनुष्य के जीवन को खतरा हो जाता है और पहले साठ मिनट (जिसे Golden Time भी कहते है ) जीवन की रक्षा के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण होते है किसी के जीवन की रक्षा के लिए अगर आप कुछ करते है तो इससे नेक कार्य दुनिया में और कोई नही हो सकता है हर रोज हमारे देश में करीब 1000 (एक हजार ) लोग अलग - अलग तरह की दुर्घटना के शिकार हो कर मौत के मुंह में चले जाते है इनमे से करीब पचास प्रतिशत लोगो की जान बचायी जा सकती है अगर उन्हें पहले घंटे में ही प्राथमिक सहायता उपलब्ध हो जाये।

First Aid - हड्डियों की टूट और जोड़ो की चोट

हड्डियों के टूटने के कारण - 

1. सीधी चोट - जहां चोट लगे वही की हड्डी टूटे, ऐसी चोट को सीधी चोट कहते है जैसे बांह पर लाठी लगने से बांह की हड्डी टूटना ।
2. कुटिल चोट - चोट किसी स्थान पर लगे और हड्डी किसी दूसरे स्थान की टूटे ऐसी चोट कुटिल चोट कहलाती है जैसे - हथेली के बल गिरने से हंसली की हड्डी टूटना तथा एडियो के बल गिरने से रीढ़ की या खोपड़ी के तले की हड्डी टूटना ।
3. मांस पेशियों का तनाव - मांस पेशियो के अत्यधिक तनाव में भी हड्डी टूट जाती है जैसे खेलते या दौड़ते समय घुटने की पटेला अस्थि का टूट जाना अथवा मरोड़ने पर कलाई या कुहनी पर से हाथ की हड्डियों का टूट जाना ।

First Aid - कुछ विशेष जानकारी

  • कभी  भी कोई एलोपैथी दवाई किसी भी डॉक्टर की सलाह के बिना न तो स्वयं ले न किसी को दे
  •  बिना लेवल वाली दवाइयो को अपने घर में न रखे
  •  घर में हर तरह की दवाईया, कीड़े या चूहे मारने की दवा, सफाई में काम में आने वाले अम्ल या क्षार बच्चो की पहुँच से दूर रखे क्योकि दुर्घटना के कारण बं जाते है
  • . बिजली के उपकरणों को सुरक्षित रखे

1/06/2021

First Aid - उदेश्य एवं सिद्धांत


First Aid के उदेश्य 
  • घायल व्यक्ति का जान बचाना
  • बिगड़ी हालत से बाहरा निकालना
  • तबियत के सुधार में बढ़ावा देना

First Aid - Heavy Bleeding

Q. What should one do if the patient is bleeding heavily?

Put pressure on the wound with whatever available to stop or slow down the flow of the blood.
Call local emergency numbers or ask for some body help to get to hospital.
Keep pressure on the wound until the help arrives.

Q. The person looks pale and feels cold and dizzy. What does this mean?
It means there isn’t enough blood flowing through the body. It can be life threatening because it can very quickly lead to other conditions, such as lack of oxygen in the body’s tissues, heart attack or organ damage. This physical response to an injury or illness is called shock.
If you suspect someone is going into shock, lie him down and lift his feet higher than the rest of his body. Such that the legs are higher than the heart in this position, which helps increase blood flow to their brain and heart.

First Aid - रोगियों को ले जाने की विधियाँ

किसी भी दुर्घटना के बाद रोगी को उसी स्थान पर प्राथमिक सहायता देने के बाद यह अति आवश्यक हो जाता है ही उस रोगी को जल्द से जल्द किसी अस्पताल में ले जाया जाए और डॉक्टर के संरक्षण में उसका इलाज करवाया जाए ऐसे में रोगी को ले जाने के लिए विभिन्न तरीके उपयोग में लाए जाते है कई बार अति शीघ्रता के कारण रोगी को अकेले या ठीक प्रकार से न उठाने और ले जाने से रोगी की तकलीफ बढ़ सकती है इसीलिए उचित तरीके से ही रोगी को अस्पताल ले जाने की कोशिश करनी चाहिए रोगी को उठाने से पहले कुछ बातो का विशेष खयाल रखना चाहिए जैसे - रोगी की साँस एवं नब्ज ठीक चल रही है या नही, घाव से खून बहना बंद हो गया  है या नही, अगर हड्डी टूट गई है तो खपच्ची ठीक तरीके से  बाँधी गई है या नही !

First Aid - विष/जहर

संसार में जितने भी पदार्थ या जीव - जंतु प्रकृति ने बनाये  है, वे चाहे कितने ही विषैले क्यों न हो,सब हमारे किसी न किसी कम आते है किन्तु कई बार जब हम उनका नासमझी से या जान - बूझकर आत्महत्या के लिये उल्टा सीधा सेवन या प्रयोग करते है तो वही हमारे लिए बीमारी या मृत्यु का कारण बन जाते है जैसे विषैली दवाइय, कीटाणु- नाशक औषधिया, गैस इत्यादि खैर,ये चीजे तो है ही विषैली लेकिन कई बार ऐसे पदार्थ जो हमारे जीवन के लिए आवश्यक है और उनसे हमारे शरीर की पुष्टि मिलती है जब लोभ - लालच में आवश्यकता से अधिक खा - पी लेते है तो  वही हमारे लिए दुखदायी जहर हो जाते है और जब तक की उनका निवारण न किया जाए, मन को शांति नही मिलती।
जहर कोई भी  वस्तु - तरल, गैस और सख्त पदार्थ हो सकते है जब यह शरीर में काफी मात्रा में ले ली जाती है अथवा दे दी जाती है तो इसका प्रभाव शरीर पर शीघ्र पड़ना आरंभ हो जाता है और यदि तत्काल प्राथमिक फर्स्ट ऐड  मिले तो जीवन नष्ट हो जाता है यह चार तरह से लिया जा सकता है लिया आत्म - हत्या के लिए और दिया जा सकता है लोभ - लालच में आकर किसी को  मारने, बेहोश करने  के लिए।

First Aid - Burns



Q. Should I use ice to cool the burn?

No, use water only. Ice may further damage the skin.

Q. Should I put a plaster over a burn to make sure it doesn't get infected?

One should not use any adhesive bandages as it’ll stick to the skin and may cause further damage. Instead the burns should be covered with cling film or a clean plastic bag which will help prevent infection.


Q. If clothes are stuck to the burn, should I try to remove them?

No. Remove any clothing or jewelry near the burned area, but don’t try to remove anything that’s stuck to the burn. This could cause more damage.

First Aid - Snake Bite

First Aid Guide - Snake Bite
Snake bite is prevalent in our community for generations, and we are not able to prevent it. Education of the common man is required from snake bite, as well as measures to be taken after the bite. Snake bite may occur at any time during lifetime. WHO (2004) provided recommendations to reduce death due to snake bite as per international norms. A primary recommendation, based on evidence based procedures, was to establish a single protocol for both first-aid and treatment, and is relevant in Indian context as well.
Remember, traditional therapy have no proven benefit in the treatment of snake bite. Do not waste time and send the patient to hospital at the earliest.

First Aid - घाव और रक्त स्राव होने पर

घाव होने पर कोशिकाये तो कटती ही है कभी - कभी धमनियाँ और शिराये भी कट जाती है। कोशिकाओ, धमनियों अथवा शिराओ के कटने से रक्त स्राव होता है। अधिक मात्रा में रक्त निकल जाने से रक्त चाप कम हो जाता है और मस्तिष्क तक रक्त कम मात्रा में पहुँचता है इसलिए नाडी संस्थान अपना कार्य ठीक नही कर सकता और घायल मूर्छित हो जाता है।साँस बंद होने को छोडकर अधिक मात्रा में रक्त स्राव सबसे खतरनाक स्थिति है ।

घाव के भेद - 

1. कटे हुए घाव - किसी धारदार वस्तु (जैसे ब्लेड, चाकू इत्यादि) से कटा हुआ इस प्रकार के घाव में धमनियों और शिराओ के कटने की अधिक सम्भावना होती है ऐसे घावों के  किनारे सीधे होते है ।
2. फटे हुए घाव - मशीनों के पुर्जो से कांच से पशुओ के  पंजो से लगे हुए घाव इनके किनारे टेढ़े - मेढ़े होते है इस तरह के घाव कटे हुए घाव से कम खतरनाक होते है ।

First Aid - Nose Bleeding


Symptoms of nose bleeding
  • Bleeding from either or both nostrils Sometimes bleeding from ears/ mouth too.
Q. What are the causes of nose bleeding
  • Dryness 
  • Blowing nose with force 
  • Use of medications, like aspirin 
  • Nose picking
  • Pushing objects into nose 
  • Injuries / blow to the nose
  • Infections of the nose
  • Atherosclerosis 
  • Blood-clotting disorders 

First Aid - फर्स्ट एड बाक्स

भारतीय रेल में  सभी स्टेशनों पर जहा स्टेशन मास्टर पदस्थापित है वहा फर्स्ट ऐड बॉक्स व पास के अस्पतालों की सूची व टेलीफोन नंबर होना अनिवार्य है इसके अलावा सभी पैसेंजर  ट्रेन के गार्ड के पास, लंबी दूरी की गाडियों (राजधानी आदि ) में पेंट्री  कार में एवं सभी कारखानों में भी फर्स्ट ऐड बॉक्स उपलब्ध रहता है किसी भी फर्स्ट एड बॉक्स पर ताला नही लगाया  जाता बल्कि उन्हें हमेशा पेपर सील किया जाता है ।

First Aid - Do's During Heart Attack

Do's during heart attack:
  • Patient should be made to sit down, rest, and try to keep calm.
  • Loosen any tight clothing.
  • Ask if the patient takes any chest pain medication for a known heart condition, such as nitroglycerin, and help him take it.
  • If the pain does not go away with rest or within 3 minutes of taking nitroglycerin, call for emergency medical help.
  • If the person is unconscious and unresponsive, call for emergency and should begin CPR.
Don'ts during heart attack:
  • Do not leave the patient alone
  • Do not allow the person to deny the symptoms .
  • Do not wait to see if the symptoms go away.
  • Do not give the person anything by mouth unless a heart medication (such as nitroglycerin) has been prescribed.

CPR(Cardiopulmonary Resuscitation): It is an emergency lifesaving procedure. It is a combination of:
  • Chest compressions that keeps patient's blood circulating.
  • Rescue breathing that provides oxygen to patient's lungs.
Chest compressions:
  • Place the heel of one hand on the lower half of the person’s breastbone.
  • Place the other hand on top of the first hand and interlock your fingers.
  • Press down firmly and smoothly (compressing to 1/3 of chest depth) 30 times.
  • Administer 2 breaths as described below in mouth-to-mouth,
  • The ratio of 30 chest compressions followed by 2 breaths is the same, whether CPR is being performed alone or with the assistance of a second person.
  • Aim for a compression rate of 100 per minute.

Effective chest compressions will be tiring. It is important to get help from others if possible, to allow changeover for rest and to keep the compressions effective.

Mouth-to-mouth Respiration:

  • If the patient is not breathing normally, make sure he is lying on his back on a firm surface
  • Open the airway by tilting the head back and lifting his chin.
  • Close his nostrils with your finger and thumb.
  • Put your mouth over the patient’s mouth and blow into his mouth.
  • Give 2 full breaths to the patient (this is called ‘rescue breathing’). Make sure there is no air leak and the chest is rising and falling. If his chest does not rise and fall, check that you’re pinching his nostrils tightly and sealing your mouth to his. If still no breathing, check airway again for any obstruction.
  • Continue CPR, repeating the cycle of 30 compressions then 2 breaths until professional help arrives.

CPR for children aged 1-8 years:

  • Use the heel of one hand only for compressions, compressing to one third of chest depth.
  • Follow the basic steps for performing CPR described above.

CPR for infant (up to 12 months of age):

  • Place the infant on his back. Do not tilt his head back or lift his chin (this is not necessary as their heads are still large in comparison to their bodies).
  • Perform mouth-to-mouth by covering the infant’s nose and mouth with your mouth – remember to use only a small breath.
  • Do chest compressions, using two fingers of one hand, to about one third of chest depth.
  • Follow the basic steps for performing CPR described above.

Q. When should we stop CPR?

Generally CPR is stopped, when:
  • The patient's revives and starts breathing on its own
  • When medical help arrives
  • When the person giving CPR is exhausted

First Aid - सदमा (आघात)

आघात प्रायः सभी प्रकार की बड़ी  चोटों या आकस्मिक घटनाओ पर हो ही जाता है यह ऐसी शक्तिहीनता की अवस्था है जिससे की  शरीर की जीवनावश्यक क्रियाए सब मन्द पड़ जाती है इसके साथ - साथ रक्त परिभ्रमण की पद्धति में स्थायी शक्तिहीनता से पूर्ण न्यूनता तक परिवर्तन हो जाता है यह दो प्रकार का होता है - 

1.Nerve Shock
2. Established Shock

आघात के कारण - 
1. शरीर से बहुत अधिक रक्त बह जाने के कारण ।
2.बहुत ज्यादा जल जाने के कारण ।
3. बहुत अधिक दर्द के कारण ।
4. बहुत अधिक ठण्ड लगने के कारण ।
5. रोगी के साथ फालतू छेड़खानी और तंग  करने के कारण ।

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